Posts

Showing posts from July, 2020

टूटी झरना मंदिर, झारखंड

Image
झारखंड के रामगढ़ में एक मंदिर ऐसा भी है जहां भगवान शंकर के शिवलिंग पर जलाभिषेक कोई और नहीं स्वयं मां गंगा करती हैं. मंदिर की खासियत यह है कि यहां जलाभिषेक साल के बारह महीने और चौबीस घंटे होता है. यह पूजा सदियों से चली आ रही है. माना जाता है कि इस जगह का उल्‍लेख पुराणों में भी मिलता है. भक्तों की आस्‍था है कि यहां पर मांगी गई हर मनोकामना पूरी होती है l झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर को लोग टूटी झरना के नाम से जानते है. मंदिर का इतिहास 1925 से जुड़ा हुआ है और माना जात है कि तब अंग्रेज इस इलाके से रेलवे लाइन बिछाने का काम कर रहे थे. पानी के लिए खुदाई के दौरान उन्हें जमीन के अन्दर कुछ गुम्बदनुमा चीज दिखाई पड़ा. अंग्रेजों ने इस बात को जानने के लिए पूरी खुदाई करवाई और अंत में ये मंदिर पूरी तरह से नजर आया.शिव भगवान की पूजा होती है l  मंदिर के अन्दर भगवान भोले का शिव लिंग मिला और उसके ठीक ऊपर मां गंगा की सफेद रंग की प्रतिमा मिली. प्रतिमा के नाभी से आपरूपी जल निकलता रहता है जो उनके दोनों हाथों की हथेली से गुजरते हुए शिव लिंग पर गिरता है. मंदिर के अन्दर गंगा की प्रतिमा स...

भारत के दस प्रसिद्ध मंदिर

गुडरिटर्न्‍स » हिन्दी » पर्सनल फिनांस टॉप 10 अमीर मंदिरों की लिस्‍ट जारी, देखें शिर्डी का साईं मंदिर कौन से स्‍थान पर By Pratima Patel Updated: Thursday, July 5, 2018, 11:55 [IST] भारत में हिंदुओं की आस्‍था मंदिरों में विराजमान भगवान से इस कदर जुड़ी है कि वो उसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं। तभी तो भक्‍त अपनी श्रद्धा और भक्ति के लिए मंदिरों में लाखों का दान करते हैं, और दान के बलबूते भारत के सैकडों मंदिर अमीर मंदिरों की लिस्‍ट में शामिल हैं। लेकिन यहां पर हम आपको सिर्फ टॉप 10 मंदिरों के बारे में बताएंगे। तो आइए जानते हैं इन मंदिरों की संपत्ति के बारे में- पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम पद्मनाभस्वामी मंदिर केवल भारत ही नहीं बल्कि विश्व के सबसे अमीर मंदिरों में से एक है। त्रिवेंद्रम केरल की राजधानी है, जो कि वोट राइड्स के लिए जाना जाता है। यह मंदिर द्रविड़ शैली वास्तुकला में बनाया गया है जो दक्षिण भारत में प्रचलित है, मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है। हाल ही में मंदिर के अंदर का वाल्‍व खोला गया था जिसमें सोने, चांदी और हीरे की जैसे बाढ़ सी गई थी। कुछ लोग यहां की संपत्ति का अनुमा...

नीलकंठेश्वर मंदिर, उदयपुर

Image
🙏🌻🌹👉चौंक गए ना? ये तो हमारी सनातन कारीगरी का एक छोटा  रत्‍न है , पता नहीं कितने अनगिनत बहुमूल्‍य रत्‍न का नामो निशान मिटा दिया गया हमारे इतिहास से,🌻🌹 इसकी शानदार नक्कशियो को देखिए देखकर  🌍"अविश्वनीय" शब्द  के अलावा सायाद कोई शब्द निकले.....🌍👈 👉🌏लाला बलुआ पत्थर का प्रयोग केवल लालकिला बनाने में नहीं किया गया ना जाने कितने मन्दिर है जहां लाला बलुआ पत्थर का प्रयोग हुआ वो भी हजारों साल पहले, लेकिन अफसोस इस बात का है कि हम केवल लालकिले के बारे में ही जानते है😢🌏👈 😫😠🌷इसलिए हम  आपको वामपंथियों के इतिहास से जकड़ी हुई गुलामों की जंजीरों से बाहर लाने का प्रयत्न कर रहे है।।🌷😫😠😱 💥नीलकंठेश्वर_मंदिर ठीक लाल बलुआ पत्थर का निर्माण है, 10 वीं शताब्दी के परमार वास्तुकला का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।💥👌 🔥यहां आक्रमणकारियों द्वारा कई बार हमला किया गया  लेकिन इसकी भव्यता और सुंदरता को नष्ट करने में विफल रहे।🔥💥 👌🌹लेकिन यह मंदिर एक हजार साल बाद आज भी अपनी जगह पर सीना ताने सनातन से नफरत करने वालों को ललकार रहा है।🌹👌 🌲🎍🌹नीलकंठेश्वर मंदिर, उदयपुर 🌲🎍🌹

कोदंदारमा देवस्थानम, आंध्रप्रदेश

Image
अंग्रेजों ने सच ही कहा है कि भारत सपेरों का देश है क्योकिं  हमने इतिहासकारों के रूप में ऐसे सांपो को पाला है जिन्होंने अपने वामपंथी विचारधारा के जहर से हमारे वास्तविक इतिहास की हत्या कर डाली ।              वैदिक वास्तुकला से निर्मित इस मंदिर को देखिए । इसे 16वीं शताब्दी में निर्मित किया गया था । यह शानदार मंदिर भगवान राम को समर्पित है । इतनी अद्भुत निर्माण की कहीं चर्चा ही नही ?? इस फोटो को पूरा देखने के लिए इस पर क्लिक करके देखिए (कोदंदारमा देवस्थानम, आंध्रप्रदेश)

प्रेम मंदिर, वृंदावन

Image
प्रेम मंदिर, वृंदावन प्रेम मंदिर वृंदावन प्रेम मंदिर वृंदावन, जिला मथुरा, उत्तर प्रदेश में स्थित है। प्रेम मंदिर का निर्माण जगद्गुरु श्री कृपालु महाराज द्वारा भगवान कृष्ण और राधा रानी के मन्दिर के रूप में करवाया गया है। प्रेम मंदिर की सुन्दरता देखते ही बनती है यह इतना सुन्दर है के प्रेम मंदिर को देखते आप को मंदिर से प्रेम हो जायेगा। इसकी मनहोरता आप का मन मोह लेगी। प्रेम मन्दिर का निर्माण कार्य जनवरी 2001 में प्रारंभ हुआ था। प्रेम मन्दिर के निर्माण में 11 वर्षो का अथः परिश्रम और लगभग 100 करोड़ रुपए की धन राशि लगी है। इसमें इटैलियन संगमरमर का प्रयोग किया गया है और इस मंदिर को बनाने में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के लगभग एक हजार शिल्पकारों ने मिलकर तैयार किया है। इस मन्दिर का निर्माण कार्य फ़रवरी 2012 समाप्त हुआ। ग्यारह वर्ष में तैयार हुआ यह भव्य प्रेम मन्दिर सफेद इटालियन संगमरमर पर तराशा गया है। प्रेम मन्दिर दिल्ली, आगरा के राष्ट्रीय राजमार्ग 2 पर छटीकरा से लगभग 3 किलोमीटर की दुरी पर, वृंदावन की ओर भक्ति वेदान्त स्वामी मार्ग पर स्थित है। यह मन्दिर प्राचीन भारतीय शिल्पकला के पुनर्जागरण का ए...

भारत के प्रसिद्ध तीर्थस्थल

Image
https://www.amazon.in/dp/B084H9WSP5/ref=cm_sw_r_wa_apa_i_442UEbT1GBRZG मंदिर का नाम पूरा पता निकटस्थ रेलवे स्टेशन और हवाई अड्डा ऐतिहासिक पृष्ठभूमि निर्माण कला की खासियत मंदिर की विशेषताएं अन्य  ॥ विषय सूची ॥  गणेश जी के प्रसिद्ध मंदिर  1. भारत में भगवान गणपति के प्रसिद्ध मंदिर  2. सिद्धिविनायक  3. श्री सिद्धि-बुद्धि विनायक मंदिर माता के प्रसिद्ध मंदिर माता के प्रसिद्ध मंदिर  4. भारत में मैय्या के देवालय  5. वैष्णो देवी  6. कामाख्या मंदिर  7. मां दुर्गा के 51 शक्तिपीठ  8. पीतांबरा शक्तिपीठ  9. मां पूर्णागिरिधाम  10. कालकाजी मंदिर शिव जी के प्रसिद्ध मंदिर  11. महाकालेश्वर  12. केदारनाथ मंदिर  13. अमरनाथ  14. बारह ज्योतिर्लिंग  15. कैलाश मानसरोवर  16. गोपीश्वर महादेव मंदिर  17. कमलेश्वर महादेव मंदिर श्रीकृष्ण जी के प्रसिद्ध मंदिर  18. वृंदावन में श्रीकृष्ण के प्रमुख मंदिर  19. ब्रज की चैरासी कोस यात्रा  20. बांके बिहारी मंदिर  21. खाटू धाम  22. वृंदावन का इस्कॉन मंदिर...

बृहदेश्वर मंदिर

Image
Pic 1 - पिसा की झुकी मीनार ऊँचाई - 55.86 मीटर निर्माण- 1173 ईसवी उपलब्धि- खराब इंजीनियरिंग की वजह से झुकी हुई है  Pic 2 - बृहदेश्वर मंदिर ऊंचाई - 66 मीटर निर्माण - 1010 ईसवी उपलब्धि- पिसा की मीनार से ऊंची और प्राचीन होने के बावजूद आज भी अपने शिखर पर 80 टन का रहस्यमयी पत्थर लिए सीधा खड़ा है । लेकिन अफसोस कि बात है कि एक तरफ जहाँ पिसा की मीनार को ना सिर्फ दुनियाभर के लोग जानते हैं बल्कि हर साल हजारों भारतीय सहित लाखों लोग इसे देखने भी जाते हैं । वहीं हमारे बृहदेश्वर मंदिर को दुनियाभर के लोग तो दूर बल्कि भारतीय लोग भी नहीं जानते । हम अपनी महान विरासतों को विश्व पटल पर प्रचारित करने में नाकामयाब रहे क्योकिं आजादी के बाद हमारे शासक कांग्रेसी और इतिहासकार वामपंथी थे ।