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मंदिर का इतिहास
मंदिर निर्माण के प्रारंभ के संबंध में विभिन्न विद्वानों में काफी मतभेद है लेकिन अधिकांश विद्वानों ने शक्तिपीठों और ज्योतिर्लिंगों को सबसे प्राचीनतम मंदिर माना है। भगवान राम के काल में माता सीता द्वारा माता गौरी (पार्वती) की पूजा का जिक्र भी कई धार्मिक ग्रंथों में इस बात को प्रमाणित करता है कि भगवान विष्णु के राम अवतार के समय मंदिर अस्तित्व में आ चुका था। भगवान राम का काल आज से लगभग सात हजार वर्ष पूर्व (लगभग 5114 ई.पु.) माना जाता है। इसी प्रकार महाभारत काल में कृष्ण के साथ रुक्मिणी और अर्जुन के साथ सुभद्रा के भागने के दौरान दोनों नायिकाओं द्वारा देवी पूजा के लिए वन में स्थित माता गौरी (पार्वती) के मंदिर में पूजा अर्चना का जिक्र मिलता है। इसके अलावा महाभारत का युद्ध शुरू होने से पहले कृष्ण पांडवों के साथ गौरी माता के स्थल पर जाकर विजय प्राप्ति हेतु माता की पूजा का जिक्र भी मिलता है। प्राचीनकाल में यक्ष देवता, नाग देवता, भगवान शिव, माता पार्वती, माता दुर्गा, भैरव, इंद्र, और भगवान विष्णु की पूजा और प्रार्थना का प्रचलन था।सोमनाथ के मंदिर के होने का ऋग्वेद में भी उल्लेख मिलता है। इससे य...
80 टन नक्काशीदार ग्रेनाइट लगभग 216 फीट की ऊंचाई पर बिना मशीन ले जाया गया और लगभग शून्य डिग्री वाला झुकाव 130,000 टन का वजन और 6 बड़े भूकंप से बचा हुवा है... और वे पूछते हैं कि हमने क्या बनाया है ।। जहां से दुनिया सोचना बंद कर देती है वहां से सनातन धर्म की रहस्यमई दुनिया और अविष्कार शुरू होते हैं , आखिर क्यों ना करें हम गर्व खुद पर...💞 #बृहदेश्वरा_मंदिर_तंजुर_तमिलनाडु जय सनातन महान सनातन ⛳🚩🚩यतो धर्म:ततो जय:।
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