मंदिर का इतिहास
मंदिर निर्माण के प्रारंभ के संबंध में विभिन्न विद्वानों में काफी मतभेद है लेकिन अधिकांश विद्वानों ने शक्तिपीठों और ज्योतिर्लिंगों को सबसे प्राचीनतम मंदिर माना है। भगवान राम के काल में माता सीता द्वारा माता गौरी (पार्वती) की पूजा का जिक्र भी कई धार्मिक ग्रंथों में इस बात को प्रमाणित करता है कि भगवान विष्णु के राम अवतार के समय मंदिर अस्तित्व में आ चुका था। भगवान राम का काल आज से लगभग सात हजार वर्ष पूर्व (लगभग 5114 ई.पु.) माना जाता है। इसी प्रकार महाभारत काल में कृष्ण के साथ रुक्मिणी और अर्जुन के साथ सुभद्रा के भागने के दौरान दोनों नायिकाओं द्वारा देवी पूजा के लिए वन में स्थित माता गौरी (पार्वती) के मंदिर में पूजा अर्चना का जिक्र मिलता है। इसके अलावा महाभारत का युद्ध शुरू होने से पहले कृष्ण पांडवों के साथ गौरी माता के स्थल पर जाकर विजय प्राप्ति हेतु माता की पूजा का जिक्र भी मिलता है। प्राचीनकाल में यक्ष देवता, नाग देवता, भगवान शिव, माता पार्वती, माता दुर्गा, भैरव, इंद्र, और भगवान विष्णु की पूजा और प्रार्थना का प्रचलन था।सोमनाथ के मंदिर के होने का ऋग्वेद में भी उल्लेख मिलता है। इससे यह सिद्ध होता है कि भारत में मंदिर परंपरा कितनी पुरानी है। इतिहासकार मानते हैं कि ऋग्वेद की रचना 7000 से 1500 पूर्व हुई थी अर्थात आज से 9000 वर्ष पूर्व भी मंदिर अस्तित्व में थे।यूनेस्को ने ऋग्वेद की अट्ठारह सौ से पंद्रह सौ ईसा पूर्व की 30 पांडुलिपियों को सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया है। उल्लेखनीय है कि यूनेस्को की 158 सूची में भारत के महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की सूची 38 है।
अनेक विद्वानों का यह भी मानना है कि मंदिर की रचना लगभग 10000 वर्ष पूर्व हुई थी। उस काल में वैदिक ऋषि जंगल में अपने आश्रमों में ध्यान, प्रार्थना और यज्ञ किया करते थे। हालांकि लोकजीवन में मंदिरों से ज्यादा महत्त्व आत्मचिंतन, मनन और शास्त्रार्थ का था। फिर भी आम जनता शिव और पार्वती के अलावा नगर, ग्राम, और स्थान के देवी देवताओं की पूजा अर्चना किया करते थे। प्राचीन मंदिर खगोलीय स्थान को ध्यान में रखकर एक विशेष स्थान पर बनाए जाते थे। हिन्दू मंदिरों को खासकर बौद्ध, चाणक्य और गुप्तकाल में भव्यता प्रदान की जाने लगी और जो प्राचीन मंदिर थे उनका पुनः निर्माण करवाया गया। ये सभी मंदिर ज्योतिष, वास्तु और धर्म के नियमों को ध्यान में रखकर बनाए गए थे। अधिकतर मंदिर कर्क रेखा या नक्षत्रों के ठीक ऊपर बनाए गए थे। बौद्ध और जैन काल के उत्थान के दौर में मंदिर के निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाने लगा। एक ही काल में बनाए गए मंदिरों में काफी समानता भी देखने को मिलती है। दुर्भाग्यवश मध्यकाल में मुस्लिम आक्रांताओं ने जैन, बौद्ध और हिंदू मंदिरों को बड़े पैमाने पर ध्वस्त कर दिया। मलेशिया, इंडोनेशिया, अफगानिस्तान, ईरान, तिब्बत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, कंबोडिया आदि मुस्लिम और बौद्ध राष्ट्रों में अब ज्यादातर हिंदू मंदिर नाममात्र शेष बचे हैं या खंडहर में तब्दील हो चुके हैं। प्राचीन मंदिर ऊर्जा और प्रार्थना का केंद्र था जबकि आजकल के मंदिर पूजा आरती का केंद्र बन कर रह गया है।
देश के कुछ प्राचीनतम मंदिर :-
👉🏻 बिहार के कैमूर जिला के भगवानपुर अंचल में पवरा पहाड़ी पर 108 फिट की ऊंचाई पर 108 ई. में हुविश्क के शासनकाल में स्थापित माता मुंडेश्वरी का मंदिर भी प्राचीनतम मंदिर में एक माना जाता है। यहां पर शिव और पार्वती की पूजा होती है।
👉🏻 साउथ अफ्रीका सुद्वारा नाम एक गुफा में पुरातत्वविदों को महादेव की 6000 वर्ष पुरानी शिवलिंग की मूर्ति मिली जिसे कठोर ग्रेनाइट पत्थर से बनाया गया है इस शिवलिंग को खोजने वाले पुरातत्त्ववेत्ता हैरान हैं कि यह शिवलिंग यहां अभी तक सुरक्षित कैसे रहा।
👉🏻 विश्व की प्रथम ग्रेनाइट मंदिर तमिलनाडु के तंजौर में बृहदेश्वर मंदिर है। इसका निर्माण 1003-1010 ई.के बीच चोल शासक राजाराज चोल प्रथम ने करवाया था। इस मंदिर के शिखर ग्रेनाइट के 80 टन के टुकड़े से बने हैं। यह भव्य मंदिर राजाराज चोल के राज के दौरान केवल 5 वर्ष की अवधि में 1004 ए. डी. और 1009 ए.डी. के दौरान) निर्मित किया गया था।
👉🏻 तिरुपति शहर में बना विष्णु मंदिर 10 वीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था। यह विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक गंतव्य है। रोम या मक्का 10 वीं शताब्दी के दौरान बनाया गया था। रोम या मक्का जैसे धार्मिक स्थलों से बड़े इस स्थान पर प्रतिदिन औसतन 30000 श्रद्धालु आते हैं और लगभग लाखों रुपए प्रतिदिन चढ़ावा भी चढ़ता है कई शताब्दी पूर्व बना यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तु कला और शिल्प कला का अद्भुत उदाहरण है और माना जाता है कि इस मंदिर का साया कभी नजर नहीं आता है।
👉🏻 विश्व का सबसे पुराना शहर वाराणसी जिससे बनारस के नाम से भी जाना जाता है, एक प्राचीन शहर है, जिसे मंदिरों के नगर के रूप में भी जाना जाता है। भगवान बुद्ध ने 500 बी. सी. में यहां आगमन किया था और इसके बाद अयोध्या और मथुरा के मंदिरों का नंबर आता है।
👉🏻 दक्षिण में रामेश्वरम में भगवान राम द्वारा भगवान शिव के मंदिर का स्थापना का जिक्र रामायण में मिलता है।
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